"ये इश्क़ नहीं आसां,
बस इतना समझ लीजे,
इक आग का दरिया है ,
और डूब के जाना है"
लोग इश्क़ में हैं डूबते जलते
वो इश्क़ ही क्या जिसमें आग ना हो
वो इश्क़ ही क्या जो गहरा ना हो
गुमान किस बात का है तुझे ?
ये चेहरा, ये जिस्म सब मिट्टी है
जिस बात का किया तूने गुमान
वो ही सामने आ जाना है
और हाथ कुछ ना आना है,
हर ज़िद को तेरे वक्त ने तोड़ जाना है
इश्क़ है रूहानी
उसे पाक़ साफ कर, उसकी इबादत कर ले
वरना फक़त वक्त बीत जाना है,
हाथ फिर भी कुछ ना आना है.
हर ज़िद को तेरे, वक्त ने तोड़ जाना है
गुमान सीरत की कर, तो जाने
गुमान फित्रत की कर, तो जाने
गुमान इश्क़ की कर, तो जाने
गुमान अपने ईमान की कर, तो जाने
वरना हाथ फिर भी कुछ ना आना है
हर ज़िद को तेरे, वक्त ने तोड़ जाना है
हम बैठे तो हैं तेरे इंतज़ार में
तेरे गुरूर के टूटने के इंतज़ार में
ऐ झल्ले मेरे, वक्त की एहमियत को समझ ले
क्योंकि हम तो इश्क़ में फकीर बने बैठे हैं,
मगर अब भी ना सम्भला तो
तेरे हाथ फिर भी कुछ ना आना है
हर ज़िद को तेरे वक्त ने तोड़ जाना है
हर ज़िद को तेरे वक्त ने तोड़ जाना है.
-अपराजिता
